भरतपुर, 4 जुलाई। सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग राजस्थान सरकार के अटल इनोवेशन स्टूडियो एवं एक्सीलरेटर कार्यक्रम के तहत राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय परिसर स्थित आई स्टार्ट नेस्ट इन्क्यूबेशन सेंटर में एनवीडिया के सहयोग से शुक्रवार को डीप लर्निंग के मूल सिद्धांत पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में 25 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
उप निदेशक इनक्यूबेटर सेंटर सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग हरि मोहन शर्मा ने बताया कि कार्यशाला में प्रतिभागियों को डीप लर्निंग तकनीक से परिचित कराया गया, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र की एक उन्नत और प्रभावशाली विधि है। डीप लर्निंग एक शक्तिशाली तकनीक है, जिसमें बहु-स्तरीय कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क का उपयोग कर वस्तु पहचान, भाषण समझना और भाषा अनुवाद जैसे कार्यों में अत्याधुनिक सटीकता प्राप्त की जाती है। उन्होंने बताया कि डीप लर्निंग की मदद से कंप्यूटर ऐसे डेटा से पैटर्न सीख सकते हैं और उन्हें पहचान सकते हैं, जिन्हें विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए सॉफ्टवेयर के लिए बहुत जटिल या सूक्ष्म माना जाता है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को डेटा ऑगमेंटेशन, ट्रांसफर लर्निंग, और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण जैसे आधुनिक और महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया गया। मूल्यांकन को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर, प्रतिभागियों को एनवीडिया डीएलआई प्रमाणपत्र प्राप्त होगा जो उनके विषय विशेषज्ञता को मान्यता देगा और उनके पेशेवर कैरियर विकास में सहायता करेगा।
कार्यशाला का संचालन डॉ. अरुण पांडियन, एनवीडिया एम्बेसडर द्वारा किया गया और विद्यार्थियों को डीप लर्निंग की विभिन्न तकनीकों और उनके अनुप्रयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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आई स्टार्ट नेस्ट इन्क्यूबेशन सेंटर में डीप लर्निंग के मूल सिद्धांत पर कार्यशाला आयोजित
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आई स्टार्ट नेस्ट इन्क्यूबेशन सेंटर में डीप लर्निंग के मूल सिद्धांत पर कार्यशाला आयोजित
भरतपुर, 4 जुलाई। सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग राजस्थान सरकार के अटल इनोवेशन स्टूडियो एवं एक्सीलरेटर कार्यक्रम के तहत राजकीय अभियांत्रिकी
महाविद्यालय परिसर स्थित आई स्टार्ट नेस्ट इन्क्यूबेशन सेंटर में एनवीडिया के सहयोग से शुक्रवार को डीप लर्निंग के मूल सिद्धांत पर कार्यशाला का आयोजन
किया गया। कार्यशाला में 25 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
उप निदेशक इनक्यूबेटर सेंटर सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग हरि मोहन शर्मा ने बताया कि कार्यशाला में प्रतिभागियों को डीप लर्निंग तकनीक से परिचित
कराया गया, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र की एक उन्नत और प्रभावशाली विधि है। डीप लर्निंग एक शक्तिशाली तकनीक है, जिसमें बहु-स्तरीय कृत्रिम तंत्रिका
नेटवर्क का उपयोग कर वस्तु पहचान, भाषण समझना और भाषा अनुवाद जैसे कार्यों में अत्याधुनिक सटीकता प्राप्त की जाती है। उन्होंने बताया कि डीप लर्निंग की मदद
से कंप्यूटर ऐसे डेटा से पैटर्न सीख सकते हैं और उन्हें पहचान सकते हैं, जिन्हें विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए सॉफ्टवेयर के लिए बहुत जटिल या सूक्ष्म माना जाता
है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को डेटा ऑगमेंटेशन, ट्रांसफर लर्निंग, और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण जैसे आधुनिक और महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक ज्ञान
प्रदान किया गया। मूल्यांकन को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर, प्रतिभागियों को एनवीडिया डीएलआई प्रमाणपत्र प्राप्त होगा जो उनके विषय विशेषज्ञता को मान्यता
देगा और उनके पेशेवर कैरियर विकास में सहायता करेगा।
कार्यशाला का संचालन डॉ. अरुण पांडियन, एनवीडिया एम्बेसडर द्वारा किया गया और विद्यार्थियों को डीप लर्निंग की विभिन्न तकनीकों और उनके अनुप्रयोगों के बारे
में विस्तार से जानकारी दी।