महाविद्यालय के डीन डॉ. उदय भान सिंह ने बताया कि क्रोप केफेटेरिया लगाने का उद्देश्य किसान व विद्यार्थियों को एक निश्चित जलवायु की परिस्थितियों में विभिन्न फसलों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करना है। इस केफेटेरिया को देखकर किसान को अपनी जलवायु एवं मिट्टी की परिस्थितियों में फसल चयन करने में सहायता मिलती है। इस केफेटेरिया में बाजरा, ज्वार, उड़द, मूँग, तिल, रागी, संवासहित 12 फसलों तथा उनकी विभिन्न किस्मों को शामिल किया गया है। केफेटेरिया प्रभारी डॉ. रामफूल पूनिया ने बताया कि केफेटेरिया से किसान और विद्यार्थियों को विभिन्न फसलों का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है। साथ ही नयी फसलों जैसे रागी, संवा, कांगनी, कुटकी, कोडा़े, चीना की आदि नई फसलों की जानकारी मिलती है। प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार राजस्थान में ज्यादातर मिलेट्स की सफल खेती संम्भव है। ये माइनर मिलेट्स न केवल पोष्टिक हैं बल्ेिक ज्यादा दामों पर बिकने के कारण लाभकारी भी हैं।
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-कृषि महाविद्यालय कुम्हेर पर लगाया गया क्र्रोप केफेटेरिया
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कृषि महाविद्यालय कुम्हेर पर लगाया गया क्र्रोप केफेटेरिया
भरतपुर, 08 जुलाई। कृषि महाविद्यालय कुम्हेर पर किसानों एवं विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु क्र्रोप केफेटेरिया लगाया गया है।
महाविद्यालय के डीन डॉ. उदय भान सिंह ने बताया कि क्रोप केफेटेरिया लगाने का उद्देश्य किसान व विद्यार्थियों को एक निश्चित जलवायु की परिस्थितियों में
विभिन्न फसलों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करना है। इस केफेटेरिया को देखकर किसान को अपनी जलवायु एवं मिट्टी की परिस्थितियों में फसल चयन करने में सहायता
मिलती है। इस केफेटेरिया में बाजरा, ज्वार, उड़द, मूँग, तिल, रागी, संवासहित 12 फसलों तथा उनकी विभिन्न किस्मों को शामिल किया गया है। केफेटेरिया प्रभारी डॉ.
रामफूल पूनिया ने बताया कि केफेटेरिया से किसान और विद्यार्थियों को विभिन्न फसलों का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है। साथ ही नयी फसलों जैसे रागी, संवा, कांगनी,
कुटकी, कोडा़े, चीना की आदि नई फसलों की जानकारी मिलती है। प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार राजस्थान में ज्यादातर मिलेट्स की सफल खेती संम्भव है। ये माइनर
मिलेट्स न केवल पोष्टिक हैं बल्ेिक ज्यादा दामों पर बिकने के कारण लाभकारी भी हैं।