*विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के उपलक्ष्य में विचारगोष्ठी आयोजित* भरतपुर, 13 जून। कृषि महाविद्यालय भुसावर पर विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के उपलक्ष्य में विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के डीन डॉ. उदय भान सिंह ने कहा कि वर्ष 2000 से लेकर 2 दशकों तक दुनिया में बाल मजदूरों की संख्या लगातार घट रही थी, लेकिन पिछले वर्षों में कोविड-19

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महामारी व आर्थिक संकटों ने अधिक परिवारों को गरीबी में ढकेल दिया तथा बाल श्रम में प्रगति के बावजूद 160 मिलियन बच्चे बाल मजदूरी में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा बाल श्रम अफ्रीका, एशिया व प्रशांत क्षेत्रों में हैं यानि कि निम्न आय वाले देशों में है। उन्होंने कहा कि 5 वर्ष से 17 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों से उनकी क्षमता से अधिक जोखिमपूर्ण कार्य करवाना जिससे उनका स्वास्थ्य एवं शिक्षा प्रभावित होती है, बाल श्रम की श्रेणी में आता है। यह कानूनी अपराध है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 14 वर्ष तक आयु वर्ग के बच्चों की निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की है। बाल श्रम रोकने के लिए परिवार, समाज, स्वयंसेवी संगठन व सरकार सभी को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। डॉ. मोहित कुमार ने कहा कि विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2025 की थीम प्रगति स्पष्ट है लेकिन अभी और काम करना बाकी है। हमें बाल श्रम के प्रति जागरूक व संवेदनशील होने की जरूरत है। इस अवसर पर समस्त कॉलेज स्टॉफ व विद्यार्थी उपस्थित थे।