भरतपुर विकास प्राधिकरण की प्रस्तावित लैंड पूलिंग योजना को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। मलाह गांव में आयोजित जनसुनवाई शिविर में उस समय माहौल गरमा गया जब बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने अधिकारियों पर केवल औपचारिकता निभाने और किसानों को गुमराह कर सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर करवाने का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि बिना पूरी जानकारी दिए और भविष्य की स्पष्ट गारंटी के बिना जमीन देने का दबाव बनाया जा रहा है।
बैठक में किसानों ने अधिकारियों से कई तीखे सवाल पूछे। किसानों ने कहा कि पहले की योजनाओं में भी लोगों को वर्षों तक पूरा लाभ नहीं मिला, ऐसे में अब फिर नई योजना के नाम पर भरोसा कैसे किया जाए। किसानों ने मुआवजा, कन्वर्जन शुल्क, सड़क सुविधा, भूखंड आवंटन और 55 प्रतिशत जमीन वापसी के मुद्दे पर स्पष्ट जवाब मांगे। लेकिन अधिकारियों के जवाबों से किसान संतुष्ट नहीं हुए।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन केवल कागजी सहमति दिखाकर योजना को आगे बढ़ाना चाहता है, जबकि ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं और भविष्य की चिंता को नजरअंदाज किया जा रहा है। बैठक में मौजूद कई किसानों ने साफ कहा कि उनकी जमीन ही उनकी जिंदगी और रोजी-रोटी का आधार है, इसलिए बिना पूरी सुरक्षा और लिखित गारंटी के कोई भी किसान अपनी जमीन नहीं देगा।
विरोध बढ़ता देख अधिकारियों को बिना सहमति लिए ही वापस लौटना पड़ा। इसके बाद किसानों ने अलग बैठक कर आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि यदि उनकी मांगों और अधिकारों की अनदेखी की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसानों का कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अब किसानों के समर्थन में माहौल बनता दिखाई दे रहा है। लोग खुलकर कह रहे हैं कि किसानों को जागरूक रहना होगा ताकि उनका हक किसी भी कीमत पर न छीना जा सके। भरतपुर में लैंड पूलिंग योजना को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक हलचल भी तेज होती नजर आ रही है।
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भरतपुर में लैंड पूलिंग योजना पर किसानों का बड़ा विरोध, बोले– “हक छीनने नहीं देंगे”
राजस्थान बेधड़क न्यूज से ब्रेकिंग न्यूज़:
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भरतपुर में लैंड पूलिंग योजना पर किसानों का बड़ा विरोध, बोले– “हक छीनने नहीं देंगे”
भरतपुर विकास प्राधिकरण की प्रस्तावित लैंड पूलिंग योजना को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। मलाह गांव में आयोजित
जनसुनवाई शिविर में उस समय माहौल गरमा गया जब बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने अधिकारियों पर केवल औपचारिकता निभाने और किसानों को गुमराह कर सहमति पत्रों
पर हस्ताक्षर करवाने का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि बिना पूरी जानकारी दिए और भविष्य की स्पष्ट गारंटी के बिना जमीन देने का दबाव बनाया जा रहा है।
बैठक में किसानों ने अधिकारियों से कई तीखे सवाल पूछे। किसानों ने कहा कि पहले की योजनाओं में भी लोगों को वर्षों तक पूरा लाभ नहीं मिला, ऐसे में अब फिर नई
योजना के नाम पर भरोसा कैसे किया जाए। किसानों ने मुआवजा, कन्वर्जन शुल्क, सड़क सुविधा, भूखंड आवंटन और 55 प्रतिशत जमीन वापसी के मुद्दे पर स्पष्ट जवाब मांगे।
लेकिन अधिकारियों के जवाबों से किसान संतुष्ट नहीं हुए।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन केवल कागजी सहमति दिखाकर योजना को आगे बढ़ाना चाहता है, जबकि ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं और भविष्य की चिंता को नजरअंदाज
किया जा रहा है। बैठक में मौजूद कई किसानों ने साफ कहा कि उनकी जमीन ही उनकी जिंदगी और रोजी-रोटी का आधार है, इसलिए बिना पूरी सुरक्षा और लिखित गारंटी के कोई भी
किसान अपनी जमीन नहीं देगा।
विरोध बढ़ता देख अधिकारियों को बिना सहमति लिए ही वापस लौटना पड़ा। इसके बाद किसानों ने अलग बैठक कर आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की। ग्रामीणों ने एकजुट होकर
कहा कि यदि उनकी मांगों और अधिकारों की अनदेखी की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसानों का कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के
भविष्य का सवाल है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अब किसानों के समर्थन में माहौल बनता दिखाई दे रहा है। लोग खुलकर कह रहे हैं कि किसानों को जागरूक रहना होगा ताकि उनका हक किसी भी कीमत
पर न छीना जा सके। भरतपुर में लैंड पूलिंग योजना को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक हलचल भी तेज होती नजर आ रही है।