सहायक आचार्यों ने उठाई वेतनवृद्धि में भेदभाव खत्म करने की मांग रूक्टा ने सरकार से जनवरी और जुलाई दोनों विकल्प लागू करने की अपील राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ यानी रूक्टा ने राज्य सरकार से राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत सहायक आचार्यों को वार्षिक

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वेतनवृद्धि के लिए जनवरी और जुलाई दोनों विकल्प देने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2018 के बाद नियुक्त करीब 2300 सहायक आचार्य वर्तमान नियमों के कारण आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। रूक्टा के महामंत्री डॉ. बनय सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में अन्य विभागों के कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि पूर्ण होने के बाद वेतनवृद्धि के लिए दो विकल्प देने का प्रावधान किया था। इसके तहत यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति 1 जनवरी से 30 जून के बीच हुई है तो उसे 1 जुलाई से वेतनवृद्धि का लाभ मिलता है, जबकि 1 जुलाई से 31 दिसंबर के बीच नियुक्त कर्मचारियों को 1 जनवरी से वेतनवृद्धि का विकल्प दिया जाता है। लेकिन यह व्यवस्था अब तक राजकीय महाविद्यालयों के सहायक आचार्यों पर लागू नहीं की गई है। रूक्टा ने इसे शिक्षकों के साथ भेदभावपूर्ण नीति बताते हुए सरकार से तत्काल संशोधन लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि वर्तमान नियमों के अनुसार दो वर्ष का प्रोबेशन पूरा करने के बाद भी सहायक आचार्यों को केवल अगली 1 जुलाई से ही वेतनवृद्धि मिलती है, जिससे उन्हें महीनों तक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। रूक्टा अध्यक्ष डॉ. रघुराज परिहार ने कहा कि भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय ने भी वर्ष 2017 के नियमों में संशोधन कर उच्च शिक्षा के शिक्षकों को 1 जनवरी और 1 जुलाई दोनों विकल्प देने के निर्देश राज्यों को जारी किए थे। इसके बावजूद राजस्थान में कॉलेज शिक्षकों को यह सुविधा नहीं दी गई। संगठन ने कॉलेज शिक्षा आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर राज्य सरकार से मांग की है कि अन्य कर्मचारियों की तरह सहायक आचार्यों को भी वेतनवृद्धि के दोनों विकल्पों का लाभ दिया जाए, ताकि शिक्षकों के साथ हो रहे आर्थिक भेदभाव को समाप्त किया जा सके। अब इस मुद्दे पर राज्य सरकार के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।