तुलसी माला ने बदली किस्मत: निरक्षर महिला बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल भरतपुर/नदबई। कहते हैं कि जिसके पास हुनर और तकनीकी ज्ञान हो, वह कभी बेरोजगार नहीं रह सकता। इस कहावत को सच कर दिखाया है भरतपुर जिले की नदबई तहसील के गांव बैलारा की निवासी ओमवती शर्मा ने। निरक्षर होने के बावजूद ओमवती शर्मा ने तुलसी माला निर्माण का कार्य सीखकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

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ओमवती शर्मा बताती हैं कि कुछ वर्ष पहले उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। इसी दौरान समूह भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता और प्रदेश प्रभारी पुनीत गुप्ता के मार्गदर्शन में उन्हें तुलसी माला निर्माण का प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण के साथ-साथ उन्हें आर्थिक सहयोग और बाजार की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई, जिससे उनके कारोबार को नई दिशा मिली। आज ओमवती शर्मा का तुलसी माला निर्माण का व्यवसाय देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंच चुका है। उनके द्वारा तैयार की गई तुलसी मालाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। इस कार्य से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 2 से 3 लाख रुपये की आय हो रही है, जिससे उनका परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है। समूह भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने बताया कि भरतपुर-डीग और धौलपुर जिलों में 5 हजार से अधिक महिलाएं तुलसी माला निर्माण के कारोबार से जुड़ी हुई हैं। इनमें से करीब ढाई हजार महिलाएं केवल भरतपुर-डीग जिले की हैं। यह अभियान ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का सफल माध्यम बन रहा है। पिछले पांच वर्षों में ओमवती शर्मा ने तुलसी माला निर्माण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी सफलता को देखते हुए अब गांव बैलारा में उनके घर पर तुलसी निर्माण कुटीर (बानी) तथा तुलसी माला प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके माध्यम से क्षेत्र की अन्य महिलाओं और युवतियों को भी प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। ओमवती शर्मा की यह सफलता साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में नई पहचान स्थापित कर सकती हैं। "निरक्षर महिला बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल, तुलसी माला कारोबार से सालाना लाखों की कमाई" "नदबई के बैलारा गांव की ओमवती शर्मा ने तुलसी माला निर्माण से बदली अपनी तकदीर, अब बनेंगी सैकड़ों महिलाओं के रोजगार की आधारशिला"