भरतपुर, 01 जून। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव एवं ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। ऐसी परिस्थिति में देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक एवं पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर देशभर में पारम्परिक ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय पुरस्कार योजना प्रारम्भ करने का सुझाव दिया है।जिससे ऊर्जा संकट अवसर में बदल जाएगा !
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में सीताराम गुप्ता ने कहा है कि यदि बायोगैस, रूफटॉप सोलर सिस्टम, इंडक्शन चूल्हा, ऊर्जा संरक्षण एवं इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए तो भारत न केवल स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बन सकता है, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर होने वाले भारी विदेशी मुद्रा व्यय में भी बड़ी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, ग्रामीण आत्मनिर्भरता तथा महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पत्र में सुझाव दिया गया है कि केंद्र सरकार “राष्ट्रीय बायोगैस ग्राम अभियान” प्रारम्भ करे, जिसके अंतर्गत अधिकतम बायोगैस उपयोग करने वाली ग्राम पंचायतों, जिलों एवं राज्यों को विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किए जाएं। प्रस्ताव के अनुसार सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत को 5 लाख रुपये, जिले को 2 लाख रुपये तथा राज्य को 11 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाए। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट बायोगैस मॉडल विकसित करने वाले गाँव को 51 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाए। गुप्ता ने उल्लेख किया कि बायोगैस के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गैस, बिजली तथा जैविक खाद की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित हो सकती है, जिससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।
सीताराम गुप्ता ने रूफटॉप सोलर मिशन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी विस्तृत सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत सोलर ऊर्जा उपयोग करने वाले गाँव को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले गाँव को 51 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले गाँव को 31 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाए। इसके अतिरिक्त सर्वाधिक रूफटॉप सोलर स्थापित करने वाली शहरी कॉलोनी को 11 लाख रुपये तथा संबंधित नगर निकाय को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का भी सुझाव रखा गया है। उनका मानना है कि इससे आमजन में सौर ऊर्जा अपनाने की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तथा बिजली बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
पत्र में घरेलू ऊर्जा बचत एवं स्वच्छ रसोई व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए इंडक्शन चूल्हों के उपयोग को भी प्रोत्साहित करने की मांग की गई है। गुप्ता ने सुझाव दिया कि सर्वाधिक इंडक्शन चूल्हा उपयोग करने वाली ग्राम पंचायत एवं शहरी वार्ड को 5-5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाए। उन्होंने विशेष रूप से सुझाव दिया कि इन सभी पुरस्कारों को महिलाओं के नाम पर प्रदान किया जाए, ताकि महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल सके और परिवार स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की प्रेरणा मजबूत हो।
समृद्ध भारत अभियान के निदेशक ने राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर “पारम्परिक ऊर्जा प्रोत्साहन पुरस्कार योजना” लागू करने का भी प्रस्ताव रखा है। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार 51 लाख रुपये, द्वितीय 31 लाख रुपये तथा तृतीय 21 लाख रुपये रखा जाए। इसी प्रकार राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार 11 लाख रुपये, द्वितीय 5 लाख रुपये एवं तृतीय 2 लाख रुपये तथा जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार 1 लाख रुपये, द्वितीय 51 हजार रुपये एवं तृतीय 21 हजार रुपये प्रदान किए जाएं।
गुप्ता ने अपने पत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों एवं ऊर्जा संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि सर्वश्रेष्ठ ई-रिक्शा उपयोग करने वाले शहर को 11 लाख रुपये, ऊर्जा बचत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरकारी कार्यालय को 5 लाख रुपये तथा साइकिल उपयोग को प्रोत्साहित करने हेतु जिला स्तर पर 2 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाए। इसके अतिरिक्त ऊर्जा संरक्षण एवं हरित पहल में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्यालयों एवं महाविद्यालयों को भी एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है।
गुप्ता ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि भरतपुर जिले को शत-प्रतिशत वैकल्पिक ऊर्जा उपयोग के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित किया जाए। यदि भरतपुर को मॉडल जिले के रूप में विकसित किया जाता है तो यह पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है ।
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पारम्परिक ऊर्जा को बढ़ावा देकर ऊर्जा संकट को अवसर में बदलने का समय
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पारम्परिक ऊर्जा को बढ़ावा देकर ऊर्जा संकट को अवसर में बदलने का समय
समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने प्रधानमंत्री को भेजा सुझाव पत्र
भरतपुर, 01 जून। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव एवं ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल
की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। ऐसी परिस्थिति में
देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक एवं पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों को व्यापक स्तर पर
प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर देशभर
में पारम्परिक ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय पुरस्कार योजना प्रारम्भ करने का सुझाव दिया है।जिससे ऊर्जा संकट अवसर में बदल जाएगा !
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में सीताराम गुप्ता ने कहा है कि यदि बायोगैस, रूफटॉप सोलर सिस्टम, इंडक्शन चूल्हा, ऊर्जा संरक्षण एवं इलेक्ट्रिक वाहनों के
उपयोग को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए तो भारत न केवल स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बन सकता है, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर होने वाले भारी
विदेशी मुद्रा व्यय में भी बड़ी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, ग्रामीण
आत्मनिर्भरता तथा महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पत्र में सुझाव दिया गया है कि केंद्र सरकार “राष्ट्रीय बायोगैस ग्राम अभियान” प्रारम्भ करे, जिसके अंतर्गत अधिकतम बायोगैस उपयोग करने वाली ग्राम पंचायतों,
जिलों एवं राज्यों को विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किए जाएं। प्रस्ताव के अनुसार सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत को 5 लाख रुपये, जिले को 2 लाख रुपये तथा
राज्य को 11 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाए। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट बायोगैस मॉडल विकसित करने वाले गाँव को 51 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान
की जाए। गुप्ता ने उल्लेख किया कि बायोगैस के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गैस, बिजली तथा जैविक खाद की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित हो सकती है, जिससे
किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।
सीताराम गुप्ता ने रूफटॉप सोलर मिशन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी विस्तृत सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत सोलर ऊर्जा उपयोग करने वाले गाँव
को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले गाँव को 51 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले गाँव को 31 हजार रुपये का पुरस्कार दिया
जाए। इसके अतिरिक्त सर्वाधिक रूफटॉप सोलर स्थापित करने वाली शहरी कॉलोनी को 11 लाख रुपये तथा संबंधित नगर निकाय को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का भी
सुझाव रखा गया है। उनका मानना है कि इससे आमजन में सौर ऊर्जा अपनाने की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तथा बिजली बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
पत्र में घरेलू ऊर्जा बचत एवं स्वच्छ रसोई व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए इंडक्शन चूल्हों के उपयोग को भी प्रोत्साहित करने की मांग की गई है। गुप्ता ने
सुझाव दिया कि सर्वाधिक इंडक्शन चूल्हा उपयोग करने वाली ग्राम पंचायत एवं शहरी वार्ड को 5-5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाए। उन्होंने विशेष रूप से सुझाव दिया
कि इन सभी पुरस्कारों को महिलाओं के नाम पर प्रदान किया जाए, ताकि महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल सके और परिवार स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की प्रेरणा
मजबूत हो।
समृद्ध भारत अभियान के निदेशक ने राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर “पारम्परिक ऊर्जा प्रोत्साहन पुरस्कार योजना” लागू करने का भी प्रस्ताव रखा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार 51 लाख रुपये, द्वितीय 31 लाख रुपये तथा तृतीय 21 लाख रुपये रखा जाए। इसी प्रकार राज्य स्तर पर प्रथम
पुरस्कार 11 लाख रुपये, द्वितीय 5 लाख रुपये एवं तृतीय 2 लाख रुपये तथा जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार 1 लाख रुपये, द्वितीय 51 हजार रुपये एवं तृतीय 21 हजार रुपये
प्रदान किए जाएं।
गुप्ता ने अपने पत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों एवं ऊर्जा संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि सर्वश्रेष्ठ ई-रिक्शा उपयोग करने वाले शहर
को 11 लाख रुपये, ऊर्जा बचत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरकारी कार्यालय को 5 लाख रुपये तथा साइकिल उपयोग को प्रोत्साहित करने हेतु जिला स्तर पर 2 लाख रुपये का
पुरस्कार दिया जाए। इसके अतिरिक्त ऊर्जा संरक्षण एवं हरित पहल में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्यालयों एवं महाविद्यालयों को भी एक लाख रुपये तक की
प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है।
गुप्ता ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि भरतपुर जिले को शत-प्रतिशत वैकल्पिक ऊर्जा उपयोग के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित किया जाए। यदि भरतपुर
को मॉडल जिले के रूप में विकसित किया जाता है तो यह पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है ।
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