हलैना (भरतपुर)। भरतपुर जिले के हलैना कस्बे के ऐतिहासिक एवं प्राचीन अतिराम सागर में कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। वर्ष 2025 और वर्ष 2026 में लगभग 15-15 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से सागर की खुदाई, सफाई, चारदीवारी तथा सुरक्षा जाली सहित विभिन्न विकास कार्य कराए गए थे। लेकिन बरसात के दौरान सागर में जलभराव होते ही हाल ही में बनी चारदीवारी और सुरक्षा जाली का हिस्सा ढह गया। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अतिराम सागर के सौंदर्यीकरण, खुदाई, सफाई, मरम्मत और अन्य विकास कार्यों के नाम पर वर्ष 1975 से अब तक लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद सागर की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि सागर का प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्वरूप भी पहले की तुलना में बिगड़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता का अभाव रहा और निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किए गए।
अतिराम सागर ग्राम पंचायत के अधीन आता है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण सागर की नियमित देखरेख नहीं हो रही है। बरसात में चारदीवारी गिरने की घटना ने निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का आरोप है कि सरकारी धन का सही उपयोग नहीं हो रहा और विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण कार्यों की तकनीकी गुणवत्ता की जांच करवाने तथा दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो भविष्य में भी सरकारी धन की बर्बादी होती रहेगी और क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर उपेक्षा का शिकार बनी रहेगी।
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पहली बारिश में ढही 15-15 लाख की चारदीवारी, अतिराम सागर पर करोड़ों खर्च के बाद भी बदहाली बरकरार
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पहली बारिश में ढही 15-15 लाख की चारदीवारी, अतिराम सागर पर करोड़ों खर्च के बाद भी बदहाली बरकरार
हलैना (भरतपुर)। भरतपुर जिले के हलैना कस्बे के ऐतिहासिक एवं प्राचीन अतिराम सागर में कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता पहली ही बारिश में सवालों के घेरे
में आ गई है। वर्ष 2025 और वर्ष 2026 में लगभग 15-15 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से सागर की खुदाई, सफाई, चारदीवारी तथा सुरक्षा जाली सहित विभिन्न विकास कार्य कराए गए थे।
लेकिन बरसात के दौरान सागर में जलभराव होते ही हाल ही में बनी चारदीवारी और सुरक्षा जाली का हिस्सा ढह गया। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के
उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अतिराम सागर के सौंदर्यीकरण, खुदाई, सफाई, मरम्मत और अन्य विकास कार्यों के नाम पर वर्ष 1975 से अब तक लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च
किए जा चुके हैं। इसके बावजूद सागर की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि सागर का प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्वरूप भी पहले की तुलना
में बिगड़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता का अभाव रहा और निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किए गए।
अतिराम सागर ग्राम पंचायत के अधीन आता है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण सागर की नियमित देखरेख नहीं हो
रही है। बरसात में चारदीवारी गिरने की घटना ने निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का आरोप है कि सरकारी धन का सही उपयोग
नहीं हो रहा और विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण कार्यों की तकनीकी गुणवत्ता की जांच करवाने तथा दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और
संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो भविष्य में भी सरकारी धन की बर्बादी
होती रहेगी और क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर उपेक्षा का शिकार बनी रहेगी।