भरतपुर जिले की पंचायत समिति उच्चैन अंतर्गत ग्राम पंचायत खडेरा से भ्रष्टाचार और कर्मचारियों के कथित शोषण का मामला सामने आया है। अटल सेवा केंद्र पर कार्यरत एक चौकीदार ने ग्राम पंचायत प्रशासन और सरपंच पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय का पूरा भुगतान नहीं किया जाता। चौकीदार का दावा है कि उसके पद के लिए लगभग 6,800 रुपये मासिक मानदेय स्वीकृत है, लेकिन उसे केवल 3,000 रुपये ही दिए जाते रहे हैं।
चौकीदार ने हाल ही में आयोजित प्रशासनिक कैंप के दौरान अधिकारियों के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले सात महीनों से उसे यह राशि भी नहीं मिली है। उसने कहा कि लगातार वेतन नहीं मिलने के कारण उसके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और बच्चों के पालन-पोषण में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़ित कर्मचारी का आरोप है कि जब उसने बकाया मानदेय की मांग की तो उसे लगातार टालमटोल किया गया। वहीं, ज्यादा दबाव बनाने पर कथित रूप से उसे यह कहकर काम छोड़ने की धमकी दी गई कि उसकी जगह दूसरे व्यक्ति को रख लिया जाएगा और वह अपना सामान समेटकर चला जाए।
मामले ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति की भावना के विपरीत माना जाएगा। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पीड़ित कर्मचारी को बकाया मानदेय दिलाने की मांग की है।
हालांकि, इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों का पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
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खडेरा पंचायत में मानदेय घोटाले के आरोप! चौकीदार बोला- 7 महीने से नहीं मिली तनख्वाह, परिवार भूखमरी के कगार पर
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भरतपुर न्यूज़
खडेरा पंचायत में मानदेय घोटाले के आरोप! चौकीदार बोला- 7 महीने से नहीं मिली तनख्वाह, परिवार भूखमरी के कगार पर
भरतपुर जिले की पंचायत समिति उच्चैन अंतर्गत ग्राम पंचायत खडेरा से भ्रष्टाचार और कर्मचारियों के कथित शोषण का मामला सामने आया है। अटल सेवा केंद्र पर
कार्यरत एक चौकीदार ने ग्राम पंचायत प्रशासन और सरपंच पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय का पूरा भुगतान नहीं किया जाता।
चौकीदार का दावा है कि उसके पद के लिए लगभग 6,800 रुपये मासिक मानदेय स्वीकृत है, लेकिन उसे केवल 3,000 रुपये ही दिए जाते रहे हैं।
चौकीदार ने हाल ही में आयोजित प्रशासनिक कैंप के दौरान अधिकारियों के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले सात महीनों से उसे यह राशि भी नहीं
मिली है। उसने कहा कि लगातार वेतन नहीं मिलने के कारण उसके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और बच्चों के पालन-पोषण में भारी कठिनाइयों का सामना
करना पड़ रहा है।
पीड़ित कर्मचारी का आरोप है कि जब उसने बकाया मानदेय की मांग की तो उसे लगातार टालमटोल किया गया। वहीं, ज्यादा दबाव बनाने पर कथित रूप से उसे यह कहकर काम
छोड़ने की धमकी दी गई कि उसकी जगह दूसरे व्यक्ति को रख लिया जाएगा और वह अपना सामान समेटकर चला जाए।
मामले ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति की भावना के विपरीत
माना जाएगा। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पीड़ित कर्मचारी को बकाया मानदेय दिलाने
की मांग की है।
हालांकि, इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों का पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना
होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।