ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों, इंटरलॉक खंजरा निर्माण, नाला निर्माण, सुलभ शौचालय, हैंडपंप बोरिंग सहित विभिन्न विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग किए जाने, नापतोल में गड़बड़ी, लोहे के पाइप के स्थान पर प्लास्टिक पाइप लगाए जाने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ चुनिंदा लोगों तक सीमित रखे जाने जैसी शिकायतें सामने आई हैं।
इसी बीच प्रशासनिक जांच की चर्चाओं के बीच सोमवार सुबह करीब 8 बजे पंचायत मुख्यालय पर आनन-फानन में बैठक आयोजित की गई। ग्रामीणों का दावा है कि बैठक में कोई महिला वार्ड पंच मौजूद नहीं थीं तथा सीमित लोगों की मौजूदगी में कागजी कार्रवाई की जा रही थी।
वहीं अटल सेवा केंद्र के चौकीदार के परिजनों ने शिविर के दौरान आरोप लगाया कि लगभग ₹6,800 मानदेय स्वीकृत होने के बावजूद उसे केवल ₹3,000 का भुगतान किया जाता है और पिछले सात महीने से मानदेय का भुगतान भी लंबित है।
मीडिया टीम द्वारा सवाल पूछे जाने पर पंचायत सचिव पर असहयोगपूर्ण एवं अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया गया। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान मीडिया टीम का यह भी आरोप है कि पंचायत मुख्यालय पर कवरेज के दौरान सरपंच पक्ष से जुड़े कुछ लोगों द्वारा समाचार संकलन में बाधा डालने का प्रयास किया गया। यदि ऐसा हुआ है, तो यह प्रेस की स्वतंत्रता और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित करेगा? यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होगी या मामला केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाएगा? यह भी देखना होगा कि प्रशासन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करता है या नहीं।
फिलहाल ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचना चाहिए।
नोट: इस संबंध में पंचायत प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। बैठक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
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खडेरा पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच जांच से पहले आनन-फानन बैठक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
राजस्थान बेधड़क न्यूज से ब्रेकिंग न्यूज़:
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भरतपुर जिले की उच्चैन पंचायत समिति की ग्राम पंचायत खडेरा एक बार फिर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है।
ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों, इंटरलॉक खंजरा निर्माण, नाला निर्माण, सुलभ शौचालय, हैंडपंप बोरिंग सहित विभिन्न विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं के आरोप
लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग किए जाने, नापतोल में गड़बड़ी, लोहे के पाइप के स्थान पर प्लास्टिक पाइप लगाए
जाने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ चुनिंदा लोगों तक सीमित रखे जाने जैसी शिकायतें सामने आई हैं।
इसी बीच प्रशासनिक जांच की चर्चाओं के बीच सोमवार सुबह करीब 8 बजे पंचायत मुख्यालय पर आनन-फानन में बैठक आयोजित की गई। ग्रामीणों का दावा है कि बैठक में कोई
महिला वार्ड पंच मौजूद नहीं थीं तथा सीमित लोगों की मौजूदगी में कागजी कार्रवाई की जा रही थी।
वहीं अटल सेवा केंद्र के चौकीदार के परिजनों ने शिविर के दौरान आरोप लगाया कि लगभग ₹6,800 मानदेय स्वीकृत होने के बावजूद उसे केवल ₹3,000 का भुगतान किया जाता है और
पिछले सात महीने से मानदेय का भुगतान भी लंबित है।
मीडिया टीम द्वारा सवाल पूछे जाने पर पंचायत सचिव पर असहयोगपूर्ण एवं अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया गया। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान मीडिया टीम का
यह भी आरोप है कि पंचायत मुख्यालय पर कवरेज के दौरान सरपंच पक्ष से जुड़े कुछ लोगों द्वारा समाचार संकलन में बाधा डालने का प्रयास किया गया। यदि ऐसा हुआ है, तो
यह प्रेस की स्वतंत्रता और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित करेगा? यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या जिम्मेदार लोगों के
विरुद्ध कार्रवाई होगी या मामला केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाएगा? यह भी देखना होगा कि प्रशासन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करता है
या नहीं।
फिलहाल ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचना चाहिए।
नोट: इस संबंध में पंचायत प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पक्ष
प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। बैठक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल