सीएम सिटी में अगावली की पुकार! खनन के दबदबे के आरोप, श्मशान का रास्ता बाधित, मंदिर और चरागाह पर संकट!   मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर में आखिर अगावली के ग्रामीणों की सुनवाई कब होगी? एक तरफ विकास के दावे, दूसरी तरफ गांव के लोगों की परेशानियां! ग्रामीणों के

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आरोप हैं कि खनन गतिविधियों के चलते श्मशान घाट तक पहुंचने का रास्ता बाधित हो रहा है। चरागाह की जमीन और प्राचीन हनुमान मंदिर तक पहुंच को लेकर भी विवाद की स्थिति बताई जा रही है। सवाल यह है कि आखिर ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी और जिम्मेदार विभाग कब जागेंगे?   भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र के अगावली गांव में खनन गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट तक जाने के रास्ते में बाधा आने से अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के लिए यह केवल रास्ते का विवाद नहीं, बल्कि सम्मान और बुनियादी अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अब सवाल है कि प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान कब करे ग्रामीणों के अनुसार, गांव में स्थित हनुमान जी का मंदिर अत्यंत प्राचीन है और उनकी मान्यता है कि यह स्वयंभू मंदिर है। ग्रामीण मंदिर तक जाने के रास्ते को लेकर भी परेशानी जता रहे हैं। वहीं, चरागाह की जमीन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि राजस्व रिकॉर्ड और लीज की सीमाओं की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि किसी के अधिकारों और धार्मिक आस्था पर प्रतिकूल असर न पड़े। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन गतिविधियों के बीच आसपास के मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। इससे लोगों में चिंता का माहौल है। इन दरारों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच जरूरी है। साथ ही, खनन की वैधता, निर्धारित लीज क्षेत्र और नियमों के पालन की निष्पक्ष जांच भी होनी चाहिए। अब सवाल मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से है—क्या अगावली के ग्रामीणों की आवाज सुनी जाएगी? क्या श्मशान, मंदिर और चरागाह तक रास्ते की समस्या दूर होगी? क्या खनन गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी? ग्रामीणों को आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए। अगावली की पुकार स्पष्ट है—जांच कराइए, रास्ते खुलवाइए और ग्रामीणों को न्याय दिलाइए!