पंचायत चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी पर उठे सवाल!   रूक्टा की दो टूक—महाविद्यालय शिक्षकों को पद और वेतनमान के अनुरूप मिले निर्वाचन की जिम्मेदारी

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जयपुर, 20 अक्टूबर। राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों के बीच राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों को निर्वाचन कार्य आवंटित करने का मामला गरमा गया है। राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (रूक्टा) ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि सहायक आचार्यों, सह आचार्यों एवं आचार्यों को उनके पद, वेतनमान और सेवा स्थिति के अनुरूप ही चुनावी जिम्मेदारियां सौंपी जाएं। संगठन ने इस संबंध में राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग उठाई है।   सवाई माधोपुर, सिरोही और डूंगरपुर में नियुक्तियों पर जताई आपत्ति   रूक्टा के अध्यक्ष प्रो. रघुराज परिहार और महामंत्री प्रो. बनय सिंह के अनुसार, सवाई माधोपुर, सिरोही एवं डूंगरपुर जिलों में राजकीय महाविद्यालयों के सहायक आचार्यों, सह आचार्यों और आचार्यों को रिटर्निंग ऑफिसर (RO) तथा पीओ-1 (PO-1) के रूप में नियुक्त किया गया है। संगठन का कहना है कि निर्वाचन कार्यों में नियुक्ति करते समय अधिकारियों के पद और वेतनमान का ध्यान रखा जाना चाहिए।   निर्वाचन आयोग के निर्देशों का दिया हवाला   रूक्टा ने अपनी मांग के समर्थन में भारत निर्वाचन आयोग के 7 जून 2023 के दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि निर्वाचन कार्यों के आवंटन में निर्धारित नियमों एवं निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि अलग-अलग जिलों में नियुक्तियों को लेकर एकरूपता बनी रहे।   प्रदेशभर के महाविद्यालय शिक्षकों के लिए समान व्यवस्था की मांग   रूक्टा ने राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग से आग्रह किया है कि प्रदेश के सभी राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत सहायक आचार्यों, सह आचार्यों एवं आचार्यों के लिए पद और वेतनमान के अनुरूप निर्वाचन कार्य निर्धारित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।   अब बड़ा सवाल यह है कि क्या निर्वाचन आयोग रूक्टा की इस मांग पर संज्ञान लेकर प्रदेशभर में एक समान व्यवस्था सुनिश्चित करेगा? आगामी पंचायत चुनावों के बीच इस मांग पर आयोग का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।