सरकारी कॉलेजों में विद्या भारती के हस्तक्षेप का रुक्टा ने किया विरोध राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (रुक्टा) ने उच्च शिक्षण संस्थाओं में विद्या भारती के कथित हस्तक्षेप का विरोध किया है। रुक्टा अध्यक्ष प्रो. रघुराज परिहार और महामंत्री प्रो. बनय सिंह ने उच्च शिक्षा विभाग के विशिष्ट शासन सचिव एवं आयुक्त कॉलेज शिक्षा को पत्र भेजकर ऐसे हस्तक्षेप को रोकने की मांग की है।

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रुक्टा का आरोप है कि नई शिक्षा नीति के नाम पर विद्या भारती की ओर से आयोजित गोष्ठी में राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को विभागीय स्तर से शामिल होने के लिए दबाव डाला गया। संगठन के मुताबिक 25 सितंबर को विद्या भारती की ओर से राष्ट्रगीत के संपूर्ण गायन के कार्यक्रम की सूचना भी आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा के संयुक्त निदेशक अकादमिक के माध्यम से विभाग के आधिकारिक ग्रुप में आदेश जैसी भाषा में साझा की गई। रुक्टा ने सवाल उठाया कि क्या विद्या भारती को सरकारी महाविद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित कराने या शिक्षकों और प्राचार्यों को निर्देशित करने का संवैधानिक अधिकार है? संगठन ने यह भी पूछा कि किसी निजी संस्था के पत्र को सरकारी महाविद्यालयों के शिक्षकों पर लागू करने का क्या प्रावधान है? महामंत्री प्रो. बनय सिंह ने कहा कि रुक्टा सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रति सहयोगात्मक रुख रखता है और राष्ट्रगीत सहित सभी राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करता है। लेकिन उनका आरोप है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रगीत की आड़ में किसी निजी संस्था का वैचारिक एजेंडा सरकारी महाविद्यालयों में प्रचारित किया जाना स्वीकार्य नहीं है। वहीं रुक्टा अध्यक्ष प्रो. रघुराज परिहार ने विद्या भारती को एक निजी संस्था बताते हुए उच्च शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप रोकने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने इस मामले में उचित कदम नहीं उठाया तो रुक्टा संवैधानिक तरीके से विरोध का रास्ता अपनाएगा। अब सवाल यह है कि सरकारी महाविद्यालयों में निजी संस्थाओं के कार्यक्रमों को लेकर विभाग की क्या नीति है और इस पूरे विवाद पर उच्च शिक्षा विभाग क्या जवाब देता है?