घाटरी –सुहारी में विकास के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प, रामादेवी चुनावी मैदान में

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20–25 वर्षों के राजनीतिक अनुभव के साथ रामादेवी ने रखा विकास का विजन, बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर रहेगा फोकस   भरतपुर। पंचायत चुनावों के बीच घाटरी और सुहारी क्षेत्र में विकास, जनसेवा और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर रामादेवी एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं। उनके साथ उनके पुत्र कप्तान सिंह, जो घाटरी में सरपंच रह चुके हैं, का भी पंचायत स्तर पर लंबे समय तक जनसेवा का अनुभव जुड़ा हुआ है। परिवार का दावा है कि अलग-अलग कार्यकाल में करीब 20 वर्षों तक पंचायत की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने सभी समाजों को साथ लेकर चलने और गांव के विकास को प्राथमिकता देने का प्रयास किया।   रामादेवी का कहना है कि राजनीति उनके लिए केवल पद हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं को समझने और उनका समाधान कराने का अवसर है। उनका जोर इस बात पर है कि गांव का विकास किसी एक वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक समाज, परिवार और जरूरतमंद व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं एवं मूलभूत सुविधाओं का लाभ पहुंचे।   बिजली, पानी, सड़क और शिक्षा पर विशेष जोर   रामादेवी ग्रामीणों के बीच अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए कह रही हैं कि क्षेत्र में बिजली की समस्या हो, पेयजल की परेशानी, खराब रास्ते, शिक्षा से जुड़ी जरूरतें या स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी—इन सभी मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाएगा। उनका संकल्प है कि घाटरी और सुहारी पंचायतों के विकास में जहां भी कमियां रह गई हैं, उन्हें पूरा कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।   उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि वे सभी को साथ लेकर चलने, आपसी भाईचारा बनाए रखने और जनसमस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत रहेंगी। उनका कहना है कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए और गांवों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार काम होना चाहिए।   अब नजर अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने पर   रामादेवी के सामने इस चुनाव में दोनों पंचायतों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती है। ग्रामीणों के बीच विकास की प्राथमिकताओं और जनसमस्याओं को लेकर चर्चा तेज है। अब देखना होगा कि चुनाव में जनता उनके अनुभव, संकल्प और विकास के वादों पर कितना भरोसा जताती है।   घाटरी और सुहारी के विकास को लेकर रामादेवी का संदेश साफ है—सबका साथ, सबका सम्मान और गांव के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास।