घाटरी खनन जोन में 'मौत का साया'! अवैध खनन से दहशत में ग्रामीण, आखिर कब जागेगा प्रशासन? भरतपुर/भुसावर। भुसावर क्षेत्र के घाटरी खनन जोन में कथित अवैध खनन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से खनन माफिया खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, जबकि प्रशासन की कार्रवाई अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं दे रही। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात होने वाली ब्लास्टिंग से उनके मकानों में दरारें पड़ गई हैं, छतें कमजोर हो चुकी हैं और हर धमाके के साथ परिवारों में दहशत फैल जाती है। कई लोग खाना छोड़कर और बच्चे घरों से बाहर निकलकर अपनी जान बचाने को मजबूर हो जाते हैं।

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ग्रामीणों के अनुसार, खनन क्षेत्र से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में सांस संबंधी परेशानियां बढ़ने की बात कही जा रही है। लोगों का सवाल है कि जब दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर सख्त कदम उठाए जाते हैं, तो घाटरी जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की चिंता क्यों नहीं की जाती? स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों पहले बंद किए जाने के आदेश के बावजूद कुछ स्थानों पर खनन और क्रशर गतिविधियां जारी हैं। उनका यह भी कहना है कि ओवरलोड वाहनों की तेज रफ्तार से सड़क हादसों का खतरा लगातार बना रहता है और क्षेत्र में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर गहरे गड्ढे और लगातार ब्लास्टिंग भविष्य में बड़े हादसों को न्योता दे रहे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आना शेष है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने, प्रदूषण की निष्पक्ष जांच कराने, प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन गंभीर शिकायतों पर कितना शीघ्र और प्रभावी कदम उठाता है, या घाटरी के लोगों को भय और प्रदूषण के बीच ही जीवन बिताना पड़ेगा।